Tuesday, April 17, 2012


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Thursday, April 12, 2012

शशि भूषण उपाध्याय का इटावा आगमन १३ को

सत्यनिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों / कर्मचारियों के संगठन सत्यमेव जयते के आधार स्तंभों में शामिल श्री शशि भूषण उपाध्याय (सेवा योजन अधिकारी कानपुर) शुक्रवार १३ अप्रैल २०१२ को इटावा पधार रहे हैं, वे शाम ६ बजे नगर पालिका के सभागार में आचार्य मोहन मिश्र की १३ वीं पुन्यतिथ पर आयोजित व्याख्यानमाला में अपने विचार व्यक्त करेंगे। आप सभी सादर आमंत्रित हैं । -----संयोजक-महेश चन्द्र तिवारी प्राचार्य

Wednesday, April 11, 2012

धर्मो रक्षति रक्षितः

न तंत्र चले न मन्त्र। जब हो निर्मल बाबा तेरी कृपा। जय गुरुदेव नाम परमात्मा का। ये जुमले क्या कहते हैं ? ऐसे कितने बाबा वेशधारी हमारी धर्म भीरुता का लाभ उठाकर लुटाने में लगे हैं। आदिगुरू शंकराचार्य ने इन कालनेमियों के बारे में स्पष्ट लिखा- जटिलो मुंडी लुन्चित केशः काशायाम्बर बहुकृत वेशः । पश्यति न च पश्यद लोके ह्यदुर निमित्तं बहुकृत शोकः॥ जटाधारी, सफाचट, केशलोची, गेरुआ बस्त्रधारी उस सत्य को देखते हुए भी नहीं देखते सिर्फ उदर पूर्ति (अकूत धन संपदा बटोरने) में तरह-तरह के तमासे करते हैं।
धर्म के मर्म से अपरचित धर्मभीरु जनता का शोषण और लूटमार कर रहे हैं। ऐसे अधर्मी कालनेमियों से धर्म को बचाना होगा, धर्मो रक्षति रक्षितः ॥ धर्म की रक्षा करने बाले की धर्म रक्षा करता है।

Wednesday, April 4, 2012

क्या है जनसभा

जनसभा ? वह नहीं जो आप समझ रहें होंगे। यह है भ्रष्टाचार से संसदीय जनतंत्र को बचाने का वैचारिक क्रान्ति अभियान।
जनतंत्र की प्राणवायु है- जन। जन समूह (मतदाताओं) द्वारा स्वयं की दशा, नेताओं का छलावा, लूटमार से निजात पाने हेतु सामूहिक चिंतनकर अपनी सकती का नाम है जनसभा।
जनता अपनी सेवा के लिए चुनते हैं सेवक। यानि संसद, विधान मंडल हैं जनसेवको के सभा स्थल । सेवकों की सभाओं (निकायों, पंचायतों,राज्य सभा, लोकसभा, विधानसभा) में चोर, लुटेरों, हत्यारों बकात्कारिओं ने कब्जा जमा लिया। सेवकों को सुधारेगा कौन? स्वामी। यानि हम-आप (जनता) जनता की संसद (जनसभा) लाएगी वैचारिक क्रान्ति। IAC ETAWAH