Wednesday, April 11, 2012

धर्मो रक्षति रक्षितः

न तंत्र चले न मन्त्र। जब हो निर्मल बाबा तेरी कृपा। जय गुरुदेव नाम परमात्मा का। ये जुमले क्या कहते हैं ? ऐसे कितने बाबा वेशधारी हमारी धर्म भीरुता का लाभ उठाकर लुटाने में लगे हैं। आदिगुरू शंकराचार्य ने इन कालनेमियों के बारे में स्पष्ट लिखा- जटिलो मुंडी लुन्चित केशः काशायाम्बर बहुकृत वेशः । पश्यति न च पश्यद लोके ह्यदुर निमित्तं बहुकृत शोकः॥ जटाधारी, सफाचट, केशलोची, गेरुआ बस्त्रधारी उस सत्य को देखते हुए भी नहीं देखते सिर्फ उदर पूर्ति (अकूत धन संपदा बटोरने) में तरह-तरह के तमासे करते हैं।
धर्म के मर्म से अपरचित धर्मभीरु जनता का शोषण और लूटमार कर रहे हैं। ऐसे अधर्मी कालनेमियों से धर्म को बचाना होगा, धर्मो रक्षति रक्षितः ॥ धर्म की रक्षा करने बाले की धर्म रक्षा करता है।

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