जनसभा ? वह नहीं जो आप समझ रहें होंगे। यह है भ्रष्टाचार से संसदीय जनतंत्र को बचाने का वैचारिक क्रान्ति अभियान।
जनतंत्र की प्राणवायु है- जन। जन समूह (मतदाताओं) द्वारा स्वयं की दशा, नेताओं का छलावा, लूटमार से निजात पाने हेतु सामूहिक चिंतनकर अपनी सकती का नाम है जनसभा।
जनता अपनी सेवा के लिए चुनते हैं सेवक। यानि संसद, विधान मंडल हैं जनसेवको के सभा स्थल । सेवकों की सभाओं (निकायों, पंचायतों,राज्य सभा, लोकसभा, विधानसभा) में चोर, लुटेरों, हत्यारों बकात्कारिओं ने कब्जा जमा लिया। सेवकों को सुधारेगा कौन? स्वामी। यानि हम-आप (जनता) जनता की संसद (जनसभा) लाएगी वैचारिक क्रान्ति। IAC ETAWAH
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