मिटाना है अब भ्रष्टाचार, जगाएं मन में शुद्ध विचार।
करें हम तौबा तृष्णा से सभी के प्रति हो सद व्यवहार॥
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स्वारथ तृष्णा त्यागना अति दुस्तर सोपान ।
फिर कैसे संभव यहाँ सदाचार परिधान॥
सदाचार परिधान मान की अभिलाषा में।
आँख फोड़ना उचित अठेनी परिभाषा में॥
त्याग, तपस्या युक्त कठिन होता है सत्पथ।
पूरा सिस्टम हेंग बनाता तृष्णा स्वारथ॥
-देवेश शास्त्री , इटावा
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